- 30 July, 2026
वेटिकन, 29 जुलाई 2026: संत पापा लियो चौदहवें ने संचार के क्षेत्र में कार्य करने वालों से आग्रह किया है कि प्रत्येक तकनीकी साधन का उपयोग “सत्य और सामान्य कल्याण की सेवा में” किया जाए, क्योंकि कलीसिया कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा प्रस्तुत अवसरों और चुनौतियों पर चिंतन कर रही है।
कार्डिनल राज्य सचिव पिएत्रो पारोलिन द्वारा हस्ताक्षरित यह संदेश सैंटियागो स्थित चिली के पोंटिफिकल कैथोलिक विश्वविद्यालय में 27-28 जुलाई को आयोजित कलीसियाई संचार पर सातवें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रतिभागियों को संबोधित था।
“कृत्रिम मेधा की चुनौतियाँ” शीर्षक वाली इस संगोष्ठी में लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के संचारकर्मी, प्रेरितिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और कलीसिया के प्रतिनिधि एकत्र हुए, ताकि संत पापा लियो चौदहवें के विश्वपत्र Magnifica humanitas के प्रकाश में कृत्रिम मेधा के नैतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभावों पर विचार किया जा सके।
कृत्रिम मेधा के युग में बुद्धिमत्ता और उत्तरदायित्व
चिली धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष रेने ओस्वाल्दो रेबोलेदो सालिनास को दिए गए अपने संदेश में संत पापा ने आशा व्यक्त की कि प्रतिभागी ऐसे संचार को बढ़ावा देंगे, जो तकनीकी विकास से प्राप्त नए अवसरों के बीच मानव व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करे और प्रत्येक साधन को सत्य तथा सामान्य कल्याण की सेवा में लगाए।
संत पापा लियो ने इस संगोष्ठी को पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन को समर्पित करते हुए प्रार्थना की कि प्रतिभागी कृत्रिम मेधा की चुनौतियों का सामना “बुद्धिमत्ता और उत्तरदायित्व” के साथ करें, ताकि कलीसियाई संचार लोगों के बीच मिलन को बढ़ावा दे और सुसमाचार की घोषणा में योगदान करे।
सामाजिक माध्यम : मानवीय स्थान
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में सैंटियागो के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल फर्नांडो नतालियो चोमाली गारिब ने सामाजिक माध्यमों की भूमिका पर विचार करते हुए उन्हें “वास्तव में मानवीय” स्थान बताया, क्योंकि वे भावनाओं, संबंधों और संघर्षों को प्रतिबिंबित करते हैं।
उन्होंने कहा, “जो कुछ हमारे साथ होता है, वह वहाँ भी होता है,” और संचार के चार मूल सिद्धांत प्रस्तुत किए—सत्य, भलाई, सुंदरता और उपयोगिता।
कार्डिनल ने इस बात पर बल दिया कि Magnifica humanitas, जो कृत्रिम मेधा के युग में मानव व्यक्ति की रक्षा पर केंद्रित है, को केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “आज कृत्रिम मेधा पर बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन यह विश्वपत्र सबसे बढ़कर मानव गरिमा और सत्य की बात करता है।”
बाबुल नहीं, यरूशलेम का निर्माण
कार्डिनल चोमाली ने कहा कि इन सिद्धांतों पर आधारित संचार ऐसे समाज में सामुदायिक जीवन को मजबूत कर सकता है, जो दिन-प्रतिदिन अधिक व्यक्तिवादी बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हम संवाद को बढ़ावा देंगे, हम भ्रातृत्व को प्रोत्साहित करेंगे; अंततः हम बाबुल नहीं, बल्कि यरूशलेम का निर्माण करेंगे।”
इन विचारों की प्रतिध्वनि पवित्र मिस्सा के समय दिए गए उपदेश में भी सुनाई दी, जिसमें उन्होंने Magnifica humanitas को “मसीह-केंद्रित” विश्वपत्र बताते हुए विवेकपूर्ण संचार का आह्वान किया और आशा व्यक्त की कि कृत्रिम मेधा सदैव मानव गरिमा की सेवा में बनी रहे।
कलीसिया की साझा यात्रा
उद्घाटन दिवस के अन्य वक्ताओं में चिली के पोंटिफिकल कैथोलिक विश्वविद्यालय के कुलपति जुआन कार्लोस दे ला लेरा और महाधर्माध्यक्ष रेबोलेदो सालिनास शामिल थे। उन्होंने इस संगोष्ठी को सिनोडलिटी तथा कलीसिया की साझा यात्रा की एक ठोस अभिव्यक्ति बताया।
उन्होंने कहा कि Magnifica humanitas के प्रकाशन ने उभरती प्रौद्योगिकियों पर कलीसिया के प्रेरितिक चिंतन को नई गहराई प्रदान की है।
उन्होंने कहा, “मानव व्यक्ति की अविच्छिन्न गरिमा ही तकनीकी विकास और वैज्ञानिक प्रगति का सिद्धांत, मापदंड और अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।”
कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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