- 23 October, 2026
सुगड़ाबाड़ी, जुलाई 8, 2025 – ओडिशा राज्य के कंधमाल ज़िले स्थित सुगड़ाबाड़ी गांव में 6 जुलाई 2025 को धन्यवाद समारोह के अवसर पर लगभग पाँच सौ विश्वासी, तीन पुरोहित और एक उपयाजक सहित, एकत्रित हुए।
मुख्य अनुष्ठानकर्ता एवं मिशन प्रभारी फादर पुरुषोत्तम नायक ने प्रवचन में कहा, “यह गांव अपनी एकता, प्रेम, उदारता और भाईचारे के लिए जाना जाता है। यहाँ के लोगों के पास सीमित आजीविका साधन हैं, फिर भी वे मसीह में गहरे विश्वास और उदारता की भावना से परिपूर्ण हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “ईश्वर हमें अपने आशीर्वाद से यूं ही नवाजता रहे ताकि हम प्रतिदिन मसीह में विश्वास में बढ़ें और इस क्षेत्र के लिए एक आदर्श कैथोलिक गांव बन सकें।”
सुगड़ाबाड़ी ज़ोन के अध्यक्ष बिजय नायक ने अपने संबोधन में कहा, “हम ईश्वर का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने बपतिस्मा, पाप स्वीकार, परम प्रसाद, विवाह और बीमारों के अभिषेक जैसे संस्कारों के माध्यम से हमारे जीवन में प्रवेश किया।” उन्होंने कटक-भुवनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बर्वा, एसवीडी, का आभार प्रकट किया, जिन्होंने इस क्षेत्र को ईश्वर के राज्य के प्रचार का अवसर प्रदान किया। उन्होंने फादर प्रदोष चंद्र नायक – जो अवर लेडी ऑफ चैरिटी पल्ली, राइकिया के पल्ली पुरोहित और कटक-भुवनेश्वर के विकर जनरल हैं – उनके निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया।
विकर जनरल फादर प्रदोष ने कहा, “अब यहाँ के बुज़ुर्गों सहित सभी विश्वासी नियमित रूप से पवित्र यूखरिस्त (मिस्सा बलिदान) का संस्कार प्राप्त कर सकेंगे। हर पुरोहित इस गांव में प्रेम, देखभाल, सहभागिता और एकता का अनुभव करता है।”
स्थानीय धर्मशिक्षक अजय नायक ने याद किया, “सुगड़ाबाड़ी एक कैथोलिक गांव है जिसने 2007-2008 के ईसाई-विरोधी हिंसा के दौरान एकजुट होकर बहादुरी से उग्रपंथियों का सामना किया। उस समय कट्टरपंथी हमारे चर्च, संस्थानों या घरों को नष्ट करने की हिम्मत नहीं कर सके।”
उन्होंने दुःख के साथ कहा, “हमारे पड़ोसी गांव – सिकोकता और मुरुडिकुपड़ा – के चर्चों को ज़मींदोज़ कर दिया गया। हमें मानसिक पीड़ा और संघर्ष का सामना करना पड़ा, लेकिन हम मसीह के नाम पर अडिग रहे।”
कटक धर्मप्रांत, जो पहले विशाखापट्टनम धर्मप्रांत का हिस्सा था, उसमें सन् 1845 से मिशनरियों ने कार्य किया। सेंट फ्रांसिस डी सेल्स (MSFS) के मिशनरियों ने यहाँ की आत्मिक ज़रूरतों की पूर्ति के लिए पल्ली स्थापित किए। फादर सफेट (MSFS), जो मोंडासोरो (दीगी) के संस्थापक थे, 1901 में इस क्षेत्र में पहुंचे और 1917 तक सेवा दी। प्रथम विश्व युद्ध के कारण अधिकांश फ्रांसीसी मिशनरी वापस लौट गए। 10 जनवरी 1922 को स्पेन के चार विन्सेंटियन पुरोहित (CM) – फादर जोस मारिया फर्नांडीज, रामोन फेरेर, वलेरियन गुमेस और मैनुअल कोएलो रे – भारत आए। फादर वलेरियन गुमेस ने सुगड़ाबाड़ी का दौरा किया और 1923 में वहाँ के जॉन बैप्टिस्ट (तुबोनाथ प्रधान) को बपतिस्मा दिया।
वर्तमान में सुगड़ाबाड़ी, जो कि अवर लेडी ऑफ चैरिटी पल्ली, राइकिया के चार ज़ोनों में से एक है, उसको 20 जून 2025 से महाधर्माध्यक्ष जॉन बर्वा, एसवीडी द्वारा मिशन स्टेशन के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने फादर पुरुषोत्तम नायक को मिशन प्रभारी नियुक्त किया। 6 जुलाई 2025 को धन्यवाद मिस्सा के दौरान फादर प्रदोष चंद्र नायक ने इसे औपचारिक रूप से मिशन स्टेशन घोषित किया।
यह मिशन स्टेशन लगभग 120 कैथोलिक परिवारों से मिलकर बना है। इस ज़ोन में चार उपस्टेशन हैं: मुरुडिकुपड़ा (23 परिवार), कोपुगुता (10), सिकोकता (10), और सोमागोटा (8 परिवार)।
कटक-भुवनेश्वर महाधर्मप्रांत में वर्तमान में 39 पल्ली हैं और हाल ही में चार नए मिशन स्टेशन बनाए गए हैं: केरुबाड़ी और पार्टमहा (अवर लेडी ऑफ द होली रोज़री पल्ली, डारिंगबाड़ी के अंतर्गत) और सुगड़ाबाड़ी एवं कोरोडा (अवर लेडी ऑफ चैरिटी पल्ली, राइकिया के अंतर्गत)।
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